देश के क्रोध को आप विभिन्न चैनलों पर देख रहे होंगे. इस आक्रोश के बीच प्रतिशोध का स्वर साफ सुनाई दे रहा है. आज पूरा देश प्रतिशोध चाहता है. सेना को मिली खुली छूट साफ तौर पर इशारा है कि अब शत्रु के रक्त से युद्धभूमि लाल करने का समय आ गया है. समय और जगह सेना के ऊपर छोड़ दिया गया है. सेना का कार्य सरकार नहीं कर सकती है, लेकिन सरकार का जो काम है, आशा है वो सरकार करने की तरफ आगे बढ़ रही होगी.
कोई भी कार्यवाही करने से पहले यह देखना होगा कि इस हमले में मास्टरमाइंड कौन है. इतने सालों के बीच देश का बच्चा-बच्चा यह बता सकता है कि इसके पीछे किसका हाथ है. एक आतंकी देश बन चुके पाकिस्तान की सेना अब दुनिया के लिए एक मुश्किल है. परमाणु हथियारों के ज़खीरे पर बैठा पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए एक फिदायीन है.
सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से किसी देश को तोड़ने के लिए लंबी तैयारी करनी पड़ती है. युद्ध के मैदान में तो देश की सेना ने अपना पराक्रम दिखाया ही हुआ है. सर्जिकल स्ट्राइक और सीमित युद्ध एक रास्ता है. सर्जिकल स्ट्राइक भारत पहले भी कर चुका है. सीमित युद्ध के विकल्प में पाकिस्तान को एक बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा, लेकिन इसके पश्चात भी आतंक का पिंजर बचा रहेगा, यहां पाकिस्तान की आत्मा को तोड़ना है.
युद्ध क्षेत्र के अलावा भी कूटनीतिक रूप से भारत पाकिस्तान को करारा जवाब दे सकता है. इसके अंतर्गत पाकिस्तान के मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया जाना चाहिए. दरअसल पाकिस्तान की सेना अपने देश की सुरक्षा और भारत में आतंकवाद फैलाने के अलावा भी विभिन्न प्रकार के काम करती है. पाकिस्तान में बिकने वाले बहुत सारे प्रोडक्ट्स का उत्पादन पाकिस्तान की सेना ही करती है. इसने पाकिस्तान की सेना के लिए एक इकोनोमिकल इकोसिस्टम बना दिया है. कुल मिलाकर इन्होंने खुद के ही देश को लूटने का एक मकड़जाल बनाया हुआ है.
अभी ‘चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर’ में भी बहुत सारे प्रोजेक्ट्स पाकिस्तान की सेना के अधिकारियों द्वारा बनाई गई कंपनियों को ही दिया गया है. जहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यही अधिकारी शामिल हैं. इसी पैसे से इन लोगों ने अपने बच्चों को विदेशों में सेटल करवा रखा हैं. इसके साथ ही इन्होंने अपने बहुत सारा पैसा भी विदेशो में निवेश किया हुआ है. मुख्यतः इनका निवेश खाड़ी और ब्रिटेन में ही है. भारत अपनी बढ़ती साख का सहारा लेकर खाड़ी देशों और अमेरिका/ब्रिटेन की सहायता लेकर इनके बिजनेस और उद्योगों पर कार्यवाही करवा सकता है!
इसके अलावा UK के साथ भी भारत अपने द्विपक्षीय संबंधों का लाभ उठा सकता है. भारत द्वारा UK सरकार पर दबाव बना वहां पर पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रॉपर्टी ज़ब्त करवाई जा सकती है. वैश्विक रूप से भारत का विभिन्न देशों, और खासकर अमेरिका, सऊदी, इजराइल और UK से संबंध पिछले कुछ सालों में प्रगाढ़ हुए हैं. उसका फायदा लेने का समय यही है. वैसे भी पाकिस्तान और चीन ने आतंकवाद के साथ जो महागठबंधन बनाया है, उसकी काट भारत सहित पूरे विश्व को ढूंढनी पड़ेगी.
पाकिस्तानी अधिकारियों को आर्थिक रूप से तोड़ने के बाद पूरे पाकिस्तान की बारी आती है. दरअसल पाकिस्तान में ‘कॉटन एंड टेक्सटाइल’ का एक बड़ा व्यापार रहा है. पाकिस्तान का ‘पंजाबी एलीट’ वर्ग इससे बड़ा मुनाफा कमाता है. इसी एक बड़े व्यापार को निशाने पर लेने के लिए भारत अपने यहाँ की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के अंदर सब्सिडी की शुरुआत कर सकता है. इससे पाकिस्तान की ओर जाने वाले ग्राहक भारत की तरफ अपना रुख करेंगे और यहां से ही अपना माल खरीदेंगे. अर्थात पाकिस्तान के अंदर निवेश का एक बड़ा रास्ता बंद कर दिया जाएगा. इसके साथ ही हमारे यहां की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए नियम और शर्तें आसान कर दी जाएं जिससे इस व्यापार के अंदर लगे हुए लोगों को फायदा हो. वहीं इस ओर एक तगड़ी रणनीति बना कर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर आघात किया जा सकता है, मगर इसके पश्चात भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर सलामत रहेगी. उसको तोड़ने के लिए भारत अपने यहां आने वाले निवेशकों पर एक शर्त लगा सकता है कि जो भी भारत में निवेश करेगा, वो पाकिस्तान में निवेश नहीं करेगा.
दुनिया में एक महाशक्ति बनने की तरफ अग्रसर भारत के साथ कोई भी देश व्यापार करना चाहेगा. ऐसा मुमकिन है कि 90% निवेशक भारत में ही निवेश करेंगे. यहां से पाकिस्तान के आर्थिक पतन की शुरुआत हो जाएगी. कोढ़ में खाज यह होगा यदि सऊदी अरब के प्रिंस द्वारा उनकी पाकिस्तान यात्रा स्थगित कर दी जाए. इसके साथ ही सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे ‘बेलआउट पैकेज’ को भी रुकवाने की तरफ भारत को कदम बढ़ाना होगा. भारत और सऊदी अरब के बीच मज़बूत रिश्ते पाकिस्तान को हमेशा से ही अखरे हैं. वहीं इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि को भी भारत अमेरिका से बात कर पूरी तरह से रुकवा सकता है. अमेरिका वैसे भी पाकिस्तान को कई बार आतंकवाद के लिए सचेत कर चुका है कि वो अपनी धरती से आतंकवाद के निर्यात को रोके, लेकिन चीन के समर्थन से उत्साहित पाकिस्तान ने कभी इस ओर कार्यवाही नहीं की है जिसके कारण अमेरिका पाकिस्तान से नाराज़ चल रहा है.
सबसे महत्वपूर्ण कार्य आता है पाकिस्तान के समाज को यह संदेश देना की उनके हुक्मरानों ने कितना भयंकर पाप किया है. यह वह तब तक नहीं समझेंगे जब तब विपत्ति उनके दरवाज़े पर नहीं पहुंच जाती है.
भारत को इसके लिए सिंधु जल समझौते के ऊपर पुनर्विचार कर वहां का पानी रोकना होगा. इससे पाकिस्तान के यहां जाने वाला भारत का पानी रुकेगा जिससे पहले से ही जल की कमी का सामना कर रहे पाकिस्तान के समाज में भी एक अफरा-तफरी का माहौल बनेगा. प्यासे गले से जिहाद छोड़िये, जग उठाने की हिम्मत नहीं बचेगी. इससे पाकिस्तान सरकार पर भी दबाव बनेगा, जिससे भारत को सशर्त पाकिस्तान से अपनी बातें मनवाने के रास्ते खुल जाएंगे.
पुलवामा का प्रतिशोध और भी बहुत तरीकों से लिया जा सकता है लेकिन एक बात जो स्पष्ट है वह ये की पाकिस्तान के लिए अब आने वाला भविष्य अंधकारमय होने वाला है. किसी मुल्क की तबाही का स्वप्न पालने वाले लोगों का खुद का घर उसी आग में जलता है जिससे वह खेल रहा होता है. शायद हमारा पड़ोसी देश इस बात को आज तक नहीं समझा है. अब समझाने का समय जा चुका है.
