पीएम के सब्र का बांध टूटा

प्रधानमंत्री मोदी का कल एबीपी न्यूज़ पर एक इंटरव्यू आया है. इंटरव्यू स्पष्ट रूप से बता गया कि इस बार मोदी किसी भी आरोप को चुपचाप झेलने वाले नहीं हैं. इस इंटरव्यू के बीच में वो हुआ जो शायद मीडिया को एक बड़ा सबक दे जाएगा.

प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू दो पत्रकारों ने लिया – रुबिका लियाकत और सुमित अवस्थी. यह दोनों ही टीवी जगत के जाने-माने नाम है. टीवी चैनल की एक बड़ी दिक्कत यह है कि वह किसी भी खबर को या फिर किसी भी इंटरव्यू को सनसनीखेज बनाने के लिए सवालों में कुछ ज्यादा ही ‘सनसनी’ डाल देते हैं. कल भी यही हुआ.

देश में राफेल सौदे पर रुबिका लियाकत ने प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछा. वह सवाल कम, और आरोप अधिक लग रहा था. रूबिका ने पूछा कि क्या यह सही नहीं है कि आपकी सरकार के दौरान ही अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया गया.

पिछले 5 साल में हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सवालों का जवाब देते हुए जिस धैर्य का परिचय देते हुए देखा है. हमें इस सवाल के जवाब में भी उसी धैर्य की आशा थी. परंतु जब प्रधानमंत्री मोदी ने इसका जवाब दिया तो उनके जवाब में तथ्यों और तर्कों का समावेश दिखा. इसके साथ ही उनका गुस्सा उनके शब्दों के साथ उनके चेहरे पर भी स्पष्ट रूप से नजर आया.

यह गुस्सा इसलिए नहीं था कि सवाल क्यों पूछा गया. यह गुस्सा इसलिए था कि विपक्ष द्वारा एक झूठी खबर को 6 महीने से चलाने के बाद भी आज देश का प्रधानमंत्री जब सवालों का जवाब देने बैठा है, तो एक मीडिया हाउस देश के प्रधानमंत्री पर ऐसे सवाल की बौछार कर रहा है जिसमें पहले से ही आरोप तय है. वो झूठ जिसकी परतें सुप्रीम कोर्ट, फ्रांस, और विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा खुल गयी है.

इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया. फ्रांस के राष्ट्रपति की बात करते हुए उन सभी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें गांधी परिवार का नाम सामने आया. उन्होंने यह आरोप लगाया कि जानबूझकर यह महत्वपूर्ण सौदा पूरा नहीं किया गया.

इस इंटरव्यू के दौरान हमने वह भी देखा जो पिछले 5 साल में नहीं देखा था. प्रधानमंत्री मोदी ने तीखे शब्दों में एबीपी न्यूज़ पर पक्षपात का आरोप लगाया. प्रधानमंत्री मोदी की आदत रही है कि वह आरोप भी मखमल में लपोटकर लगाते हैं, लेकिन इस बार उनका स्पष्ट रुख सामने बैठे दो पत्रकारों के चेहरे की रंगत उड़ा गया.

उन्होंने रुबिका लियाकत से सीधे पूछा कि क्या आपको देश की सुप्रीम कोर्ट का भरोसा नहीं, क्या आपको फ्रांस के राष्ट्रपति पर भरोसा नहीं.

भारत सरकार ने देश की संसद में खड़े होकर जिस प्रकार से इस पर जवाब दिया, क्या आप उसको भी नहीं मानेंगे.