प्रधानमंत्री मोदी आज महाराष्ट्र के वर्धा में थे. अब चुनावी मौसम है तो चुनाव के सारे दांव पेंच अपनाए जा रहे हैं. इसी बीच देश के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से एक संदेश आया है. वैसे ये संदेश मोदी ने महाराष्ट्र की धरती से दिया है, लेकिन इससे उन्होंने देश के बहुसंख्यक समाज को संबोधित किया है. कांग्रेस की एक गलती उसको कितनी भारी पड़ने वाली है, इसका आज ट्रेलर मोदी ने दिखाया है.
अपने भाषण में मोदी ने यह बात कहने में कोई गुरेज नहीं की है कि कैसे देश की बहुसंख्यक आबादी को आतंकवादी सिद्ध किया जा रहा था. सुशील कुमार शिंदे, जो कांग्रेस की सरकार में गृह मंत्री थे, उन्होंने महाराष्ट्र की धरती से ही ‘हिंदू आतंकवाद’ जैसे शब्द को गढ़ा था. इस बात का भी प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को आभास कराया.
देखा जाए तो यह सही भी है. जिस समझौता बम ब्लास्ट में आरोपियों को दोषी सिद्ध करने के प्रयास हुए, वह भी सभी संसाधनों का प्रयोग करने के बाद, वह कई सवाल खड़े करते हैं. अभी कोर्ट में स्वामी असीमानंद की रिहाई इस एक दावे को और प्रबल बनाती है कि देश की मूलाधार पर आतंक का कलंक लगाने का प्रयास तत्कालीन सरकार में किया गया. यही नही बल्कि समय – समय पर हिन्दू आस्था पर वज्रपात करने का कोई भी अवसर छोड़ा नहीं गया. मजकर5पुरोहित के साथ जो हुआ, यह भारत माता उन दोषियों को कभी क्षमा नहीं करेगी. ऐसे ही साध्वी प्रज्ञा के साथ हुए अमानवीय व्यवहार ने रोंगटे खड़े कर दिए थे.
ज़रा सोच कर देखिये की जिस बहुसंख्यक आबादी को आतंकवादी कहा गया, वह क्या सोचती होगी. उसके स्वाभिमान पर कितना बड़ा आघात लगा होगा. इसके बाद भी क्षमा याचना नहीं की गई और सत्ता का अहंकार यही से एक वटवृक्ष बन कर खड़ा हो गया. इसी की जड़ पर प्रहार जनता द्वारा 2014 के आम चुनावों में हुआ था. अब एक के बाद एक वह लोग जेल से बाइज़्ज़त बरी हो कर बाहर आ रहे हैं, जिनके आधार पर देश की बहुसंख्यक आबादी को गाली दी गयी. यह कांग्रेस पार्टी को सोचने पर मजबूर करेगी.
वहीं मोदी राहुल गांधी पर भी अप्रत्यक्ष रूप से वार करते हुए नज़र आये. उन्होंने बताया कि बहुसंख्यकों को गाली देने के बाद अब इनकी हिम्मत नहीं है कि उनसे जा कर वोट मांग पाए. इसलिए अब ये अल्पसंख्यकों के कैम्प में छिप रहे हैं. इनको पता है कि ये जीतने वाले नहीं हैं.
आपको बता दें कि राहुल गांधी अमेठी के साथ ही केरल की वायनाड सीट से लड़ेंगे जहां देश की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक है. यही राहुल गांधी की जीत का दावा मज़बूत कर रही है. अब जिस दुधारू गाय को 70 साल तक चारा खिलाया, उससे अब दूध निकालने का समय आ गया है. राहुल वही कर रहे हैं. कुल मिलाकर मोदी अब प्रचारक मोदी के मूड में आ चुके हैं. पूरी दुनिया को पता है कि प्रचाफक7मोदी अपने विरोधियों के लिए कितना घातक है. आने वाले समय में हम यह देखेंगे कि विपक्ष और पक्ष के मध्य की यह लड़ाई बहुत बड़े स्तर पर लड़ी जाएगी। आप बस इस चुनावी दंगल का आनंद लें.
