पिछले महीने की चौदह तारीख़ को पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था. इस हमले के बाद से ही भारत सहित पूरी दुनिया की नज़र भारत-पाकिस्तान सीमा पर थी. पूरी दुनिया को ये लग रहा था कि भारत किसी भी दिन पाकिस्तान पर हमला या सर्जिकल स्ट्राइक कर सकता है. पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक तो हुआ लेकिन दुनिया की सोच से दूर भारतीय सेना ने पूर्वी सीमा से लगे म्यांमार में एक ऑपरेशन शुरू कर दिया, जिसकी किसी को भी कानों कान खबर नहीं थी.
भारतीय सेना का यह ऑपरेशन म्यांमार में म्यांमार की सेना के साथ ही चल रहा था, अर्थात भारत व म्यांमार का ज्वाइंट ऑपरेशन. इस ऑपरेशन में भारत-म्यांमार बॉर्डर पर एक्टिव आतंकियों और उनके कैंपों का ख़ात्मा कर दिया गया है. यह ऑपरेशन 17 फरवरी से शुरु होकर 2 मार्च तक चला. इस ऑपरेशन की खासियत यह रही कि यह गुप्त ज्वाइंट ऑपरेशन 2 सप्ताह तक चला व इसकी किसी को भी भनक तक नहीं लगने दी गई.
खबरों के अनुसार म्यांमार के विद्रोही समूह अराकान आर्मी ने भारत-म्यांमार सीमा पर कई आतंकी कैम्प बनाए थे. ये आतंकी भारत के कालादान प्रोजेक्ट को काफी समय से टारगेट करने की योजना बना रहे थे. कालादान प्रोजेक्ट पर मंडराते खतरे की इंटेलिजेंस रिपोर्ट मिलने के बाद ही सेना ने मिजोरम के दक्षिण में म्यामांर में अड्डा बनाए आतंकियों को खदेड़ने का प्लान बनाया.
इसके लिए इंडियन आर्मी और म्यामांर आर्मी ने बड़ा ऑपरेशन शुरू किया. इसके पहले चरण में मिजोरम के लवांगताला जिले से सटे क्षेत्रों में बने नए कैंपों को नष्ट किया गया. अगले चरण में खतरनाक नागा ग्रुप, सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-खापलांग (NSCN-K) के कैंप पर धावा बोला गया. यहाँ भी आतंकियों के मारे जाने की खबर है.
रिपोर्ट्स के अनुसार डिप्लॉयमेंट और कवर किए गए एरिया के मामले में ये अपनी तरह का पहला ऑपरेशन था जो 2 सप्ताह तक चला और 2 मार्च को खत्म हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक अराकान आर्मी व काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) को चीन का समर्थन प्राप्त है..इन आतंकियों की संख्या का फ़िलहाल अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में लगभग 3000 आतंकियों की मौजूदगी का ज़िक्र किया गया है. साथ ही इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-म्यांमार के संयुक्त ऑपरेशन में इंडियन आर्मी की स्पेशल फोर्स, असम राइफल्स था और दूसरी इंफैंट्री यूनिट्स भी शामिल थीं. इस ऑपरेशन में हेलिकॉप्टर्स, ड्रोन्स और अन्य सर्विलांस उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया है.
ज्ञात हो कि गत 9 मार्च को कर्नाटक के मंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि पांच साल में इंडियन आर्मी ने तीन बार अपनी सीमा से बाहर जाकर स्ट्राइक की है. श्री सिंह ने कहा था कि वे दो स्ट्राइक के बारे में ही जानकारी देंगे, लेकिन तीसरी स्ट्राइक के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया था. मीडिया में अब यह कहा जा रहा है कि राजनाथ सिंह इसी स्ट्राइक के विषय में कर रहे थे.
खबरों के अनुसार इस स्ट्राइक में काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी के जिन आतंकियों को मारा गया है, वे म्यांमार के काचीन प्रांत के आस-पास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं. काचीन प्रान्त चीन की सीमा से सटा हुआ क्षेत्र है, जिससे चीन को इन आतंकियों को प्रशिक्षण देने में आसानी होती है.
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