क्या है ज्यां द्रेज की गिरफ्तारी का सच?

झारखंड में कल अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और दो अन्य कार्यकर्ताओं को पलामू में हिरासत में ले लिया गया. ज्यां द्रेज और उनके साथी विशुनपुरा में ‘राइट टू फूड कैंपेन’ के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे थे.

ज्यां काफी जाने माने अर्थशास्त्री हैं और इन्होंने बच्चों की सेहत, लैंगिक असमानता, शिक्षा और भुखमरी इत्यादि विषयों पर गहरा अध्ययन किया है. नरेन्द्र मोदी और बीजेपी की सरकार फासीवाद को बढ़ावा देते हुए गरीब और दुखियारों की मदद करने वालों को जेल में डाल रही है.

कांग्रेस के राहुल गांधी और आप के भूतपूर्व नेता योगेंद्र यादव इस बात से खासे नाराज नज़र आए. राहुल गांधी ने फेसबुक पोस्ट किया कि ‘झारखंड में भाजपा ने वैसे सभी लोगों के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है, जो गरीबों और वंचित समुदाय के लोगों के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा कि मैं ज्यां द्रेज को हिरासत में लिए जाने से चिंचित हूं’. पर इन दोनों नेताओं ने एक बात काफी सफाई से छुपा ली कि इन्हें सभा करने के चलते गिरफ्तार नहीं किया गया बल्कि आचार संहिता लागू होने के चलते किया गया है.

I am extremely concerned about Mr. Dreze's detention. The BJP is in a state of war with everybody who works for the poor & the downtrodden.

Posted by Rahul Gandhi on Thursday, March 28, 2019
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Yogendra yadav’s RT

डीआईजी विपुल शुक्ल ने कहा, “ज्यां द्रेज को चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन में हिरासत मे लिया गया था. उनके कार्यक्रम के आयोजकों ने एसडीओ से इसकी अनुमति नहीं ली थी.”

उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव को लेकर पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है. बिना इजाज़त के पब्लिक मीटिंग करना आचार संहिता का उल्लंघन है. इसलिए पुलिस उन्हें थाने लेकर आई थी.”

पुलिस उन्हें लेकर बिशुनपुरा थाने पहुंची और करीब तीन घंटे की हिरासत के बाद दोपहर सवा एक बजे उन्हें रिहा कर दिया. बाद में एक बॉन्ड भरने को कहा गया. उस पर लिखा था कि उन्हें प्रशासन या पुलिस से कोई शिकायत नहीं है.

हालांकि ज्यां द्रेज का कहना है कि मीटिंग की अनुमति के लिए लिखित में दस दिन पहले आवेदन भी दिया गया था लेकिन प्रशासन ने मीटिंग की अनुमति नहीं दी. चुनाव के समय ये बेहद ज़रूरी है कि लोग अपने मुद्दों के बारे में बात करें और चर्चा के लिए जगह हो.

ज्यां के साथ आए एक एक्टिविस्ट ने कहा, “हिरासत के दौरान पुलिस ने हमें बताया कि हमारे खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन समेत कुछ संज्ञेय धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करायी जाएगी और हमे जमानत लेनी होगी. हम लोगों ने इसका विरोध किया, क्योंकि हमारी सभा कहीं से गैरवाजिब नहीं थी.”

“हिरासत के दौरान पुलिस ने हमें फोन पर बातचीत नहीं करने दी और थाना प्रभारी की निगरानी में रखा गया.”

“अब हम लोग एक मीटिंग कर आगे की रणनीति तय करेंगे. यह पुलिस कार्रवाई हमारे लिए सदमे की तरह है.”

यह जानना भी दिलचस्प होगा कि ज्यां द्रेज सोनिया गांधी की कुख्यात NAC का हिस्से भी रह चुके हैं. फूड सिक्योरिटी बिल कमिटी थिंकटैंक का हिस्सा रहे ज्यां ने 1 साल की सदस्य्ता के बाद NAC फ़ूड सिक्योरिटी बिल में कुछ मतभेदों के चलते छोड़ दिया था. ज्यां फ़ूड सिक्योरिटी बिल के ढाँचे से खुश नहीं थे.

फ़ूड सिक्यॉरिटी बिल एक देश जहां कई लोग भुखमरी से त्रस्त हैं उसके लिए वरदान था. पर इसका ढाँचा सही से तैयार नहीं किया गया था. इसमें जिस वर्ग की जनता को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी उसे ही नुकसान पहुंचाया जा रहा था. इस बिल के कारण सबसे ज़्यादा नुकसान किसानों को होने वाला था जिसमें कई किसान गरीब की श्रेणी में आते हैं.

ऐसा कहा जाता है कि NAC द्वारा ही पैरेलेल तरीके से सरकार चलाई जा रही थी. यह NAC की ही शैतानी सोच थी जिसके चलते कम्यूनल वायलेंस बिल लाया जा रहा था. कम्यूनल वायलेंस बिल पूरी तरह से हिन्दूओं को निशाना बनाने के लिए बनाया गया.

अब आप ज़रा सोचिये कि यह खबर छोटे छोटे व्हाट्सअप फारवर्ड बनाकर यह झूठ फैलाया जाएगा कि मोदी जी गरीबों के दुश्मन हैं और उन्होंने मनमानी कर गरीबों के हितैषी ज्यां को गिरफ्तार करवाया. क्या आप बीजेपी राज में सरकार के खिलाफ सौ लोगों को भो इकट्ठा नहीं कर सकते? पर कोई यह नहीं बताएगा कि ज्यां को गिरफ़्तार क्यों किया गया था.



दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

Writer by fluke, started with faking news continuing the journey with Lopak.