माल्या पर शिंकजा कसा, जल्द हो सकती हैं घरवापसी

भारतीय जांच एजेंसियां व ईडी जिस प्रकार भगोड़ों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही हैं, उससे लगता है कि जल्द ही सभी भगोड़े भारतीय जेल में होंगें. भारत सरकार सभी भगोड़ों के प्रत्यर्पण का हर संभव प्रयास कर रही है. गत दिनों लंदन में हुई नीरव मोदी की गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है. नीरव मोदी की गिरफ्तारी के बाद भगोड़े करोबारी विजय माल्या को भी गिरफ़्तारी का डर सताने लगा है.

रविवार सुबह माल्या ने दो ट्वीट किए और कहा कि वह 1992 से इंग्लैंड का निवासी है. इस बात को नकारा जा रहा है और उसे भगोड़ा घोषित किया जा रहा है. साथ ही भगोड़े माल्या ने कहा कि भारत में मेरी इमेज एक पोस्टर ब्वॉय की तरह बना दी गई है. इस बात की पुष्टि खुद पीएम मोदी कर चुके हैं. मैंने पीएम मोदी के हालिया इंटरव्यू को देखा. उस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मेरा नाम लेकर कह रहे हैं कि बैंकों के मेरे ऊपर 9000 करोड़ रुपये का कर्ज है, लेकिन सरकार ने उनकी 14000 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच किया है. मतलब साफ है कि मैंने जितना लोन लिया था, उसकी रिकवरी हो चुकी है. इससे पूर्व भी माल्या इस तरह के कई ट्वीट कर चुका है. एक ऐसा ही ट्वीट गत 1 फरवरी को भी किया गया था, जिसमें माल्या ने कहा था कि मेरे द्वारा लिए गए कर्ज़ की रिकवरी के बाद भी डीआरटी द्वारा मेरी संपत्ति जब्त की जा रही है.

माल्या के इन ट्वीट्स को डर के रूप में इसलिए देखा जा रहा है, क्योंकि ईडी किसी भी कीमत पर भगोड़ों को भारत लाने का प्रयास कर रही है. माल्या को पता है कि भारत सरकार ने भी जांच एजेंसियों व ईडी को खुली छूट दे रखी है. इसलिए उसकी भी गिरफ्तारी नीरव मोदी की ही तरह किसी भी दिन हो सकती है.

सनद रहे कि पिछले दिनों माल्या के शेयर बेचकर ईडी ने एक हज़ार आठ करोड़ रुपये जुटाये थे. ये पैसे माल्या के यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड के शेयरों की बिक्री से आए थे. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच एजेंसियों ने माल्या के शेयरों को जब्त किया था. ये शेयर ‘यस बैंक’ के पास थे. कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर DRT ने यह कार्रवाई की थी. कुल मिलाकर अभी तक ईडी ने माल्या की अधिकांश संपत्ति जब्त कर ली है. जिससे माल्या के कर्ज 9000 करोड़ रुपए से अधिक की रिकवरी की जा चुकी है. 

बता दें कि ईडी द्वारा जब्ती की कार्रवाई अभी रुकने वाली नहीं है, क्योंकि नए कानून के अनुसार भगोड़ों की संपूर्ण चल-अचल संपत्ति को सरकार द्वारा जब्त किया जा सकता है. लेकिन शायद यह बात भगोड़े माल्या को पता ही नहीं है. यदि उसे भारतीय नियम कानून पता होते तो वह निश्चित ही रविवार सुबह यह ट्वीट नहीं करता. 

ज्ञात हो कि माल्या पूर्व राज्यसभा सांसद है, जो 2002 में कांग्रेस और जेडीएस की मदद से निर्दलीय सदस्य के तौर पर राज्यसभा पहुंचा था. इसके बाद माल्या ने 2005 में किंगफिशर की शुरुआत की थी जिसे आरंभ से ही बड़े नुकसान हुए. इसके बावजूद माल्या की कंपनी 2009 तक विस्तार करती रही. पहले दिए गए लोन की रिकवरी किए बिना बैंक माल्या को और लोन देते रहे.

कुछ रिपोर्ट्स में दावा भी किया गया कि माल्या को यह लोन तत्कालीन कांग्रेस सरकार की मदद से मिला.

कुछ हद तक यह दावा सच भी लगता है क्योंकि उस समय सत्ताधारी पार्टी थी कांग्रेस, निश्चित तौर पर सबकुछ उसकी जानकारी में ही हुआ होगा अन्यथा सरकार के दवाब के बगैर बैंक इतना बड़ा कर्ज़ बग़ैर रिकवरी के कैसे दिया जा सकता है.कांग्रेस की सरकार रहते हुए ही भगोड़ों को कर्ज दिया गया, और अब कांग्रेस द्वारा आरोप वर्तमान सरकार पर लगाए जा रहे हैं. 

सौ बात की एक बात यह है कि बकरे की मां कब तक ख़ैर मनाएगी… भारत सरकार के साथ साथ इंग्लैंड प्रशासन ने भी भगोड़ों के प्रत्यर्पण का प्रयास तेज किया है. देखना यह है कि नीरव मोदी की लंदन में गिरफ्तारी के बाद माल्या की गिरफ्तारी कब तक हो पाती है. माल्या फिलहाल इग्लैंड में ही रह रहा है. मुमकिन है कि उसने भी नीरव मोदी की तरह नया कारोबार शुरू कर दिया हो.

दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.

Tags: , ,