देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस से नेताओं के इस्तीफे की खबर हर रोज़ आ रही है. कांग्रेस के कुछ ऐसे नेता जिनका गांधी परिवार से ‘पारिवारिक संबंध’ रहा है, वे भी कांग्रेस छोड़ अन्य दलों में जा रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनावों से कमज़ोर हो रही कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने से अब और भी कमज़ोर होती जा रही है. ऐसी ही एक खबर सोमवार को आयी.
पीढ़ियों से कांग्रेस के वफादार रहे हाजी मोहम्मद हारून राशिद ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. हारून ने सोमवार को कांग्रेस हाईकमान को उस समय चौंका दिया जब उन्होंने घोषणा की कि वह अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. यह वही हारून राशिद हैं जिनके पिता हाजी सुल्तान राजीव गांधी और सोनिया गांधी के अमेठी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर प्रस्तावक हुआ करते थे.
हारून के इस फैसले को अमेठी में मुस्लिमों की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है. अमेठी में राहुल गांधी कांग्रेस प्रत्याशी हैं और वह यहां से तीन बार सांसद रह चुके हैं. हारून के पिता हाजी सुल्तान जिले में कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं. अमेठी लोकसभा क्षेत्र ही नहीं आसपास के सभी क्षेत्रों में वह गांधी परिवार के खास के रूप में जाने जाते हैं. सोमवार को जब हारून चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे थे, तब उन्होंने कहा कि मेरे अमेठी से चुनाव लड़ने का कारण अमेठी में विकास की कमी है. उन्होंने कहा कांग्रेस के कहने और उसके करने में बहुत बड़ा अतंर है.
अमेठी में मौजूद गरीबी इसकी कड़वी सच्चाई है और कोई भी इसे यहां के गांव में जा कर देख सकता है. हारून ने आगे कहा मैंने राहुल के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया है ताकि चीजें सही हो सकें. उन्होंने यह भी कहा कि मेरे पिता बहुत कम उम्र में ही कांग्रेस में शामिल हो गए थे. हमने 70 सालों से ज्यादा समय तक कांग्रेस का समर्थन किया है लेकिन अब यह महसूस किया कि कांग्रेस अमेठी का विकास नहीं चाहती है. 70 साल का समय बहुत अधिक होता है. यदि हम अब भी नहीं जागे तो हम कभी भी अपने भाग्य को बदल नहीं पाएंगे.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यह कहते हुए अक्सर दिखाई देते हैं कि केंद्र सरकार देश के लिए कुछ नहीं कर रही है, विकास ठप्फ हो गया है और जनता को गुमराह किया जा रहा है. लेकिन अफसोस की बात यह है कि देश की फिक्र करने वाले राहुल ने कभी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी के विकास की ओर ध्यान दिया ही नहीं है. राहुल कई बार अमेठी की जनता को विकास के सपने दिखाकर चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि अमेठी देश के सबसे कम विकास वाले इलाकों में से एक है.
मोदी सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत राहुल गांधी ने अमेठी के जगदीशपुर गांव को गोद लिया था. इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को सांसद के अतिरिक्त फंड के साथ लागू किया जाता है. बस सांसद को इस पर ध्यान देना होता है कि कौन सी योजना गांव के लोगों को लिए लाभकारी हैं. लेकिन राहुल ने कभी भी जगदीशपुर के विकास की ओर ध्यान नहीं दिया. राहुल द्वारा गोद लिए गांव की हालात देखकर समझ में आ सकता है कि ये अपने क्षेत्र के विकास को लेकर कितने सजग हैं.
डीह ब्लॉक में स्थित यह गांव अमेठी संसदीय क्षेत्र में आता है. इस गांव के स्कूल में भी दुर्दशा दिखाई देती है. बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. स्कूल में शिक्षक आते नहीं है, पढ़ाई-लिखाई भगवान भरोसे चल रही है. स्कूल में कक्षाएं बनी तो हैं, लेकिन इनमें बच्चे नहीं बल्कि कूड़ा नजर आता है. गांव में इंटर कॉलेज नहीं है, बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. राहुल गांधी देश भर में दौरे करते हैं, लेकिन आज तक उन्होंने अपने गोद लिए गांव का दौरा नहीं किया है.
यही नहीं राहुल ने 2011 में अमेठी में कचहरी बनवाने का वादा किया गया था, लेकिन 2017 तक ये नहीं बन पाया था. जब उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो ही कचहरी का निर्माण हो सका. अमेठी के गांवों में आते ही कच्ची सड़कें, कीचड़ के बीच फंसती गाड़ियां, प्रधानमंत्री आवास योजना होने के बावजूद कच्चे घर ये साबित करते हैं कि विकास के मामले में अमेठी कितना पिछड़ा है.
जनता की उपेक्षा का आलम यह था कि पिपरी और उसके आस पास के गांव गोमती नदी की कटान में निरंतर कट रहे थे. बांध नहीं बनने की वजह से पिपरी के मतदाताओं ने 2014 के चुनाव का बहिष्कार किया था. लेकिन योगी सरकार ने आते ही इसके लिए 15 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिये जिसका फंड रिलीज किया जा चुका है. अमेठी विधानसभा के परसौली में भी बीते 31 वर्षों से सड़क नहीं थी. इसी कारण यहां के लोगों ने विधानसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार भी किया था. प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आते ही सबसे पहले सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की और परसौली को भी सड़क मिल गया है.
वहीं यदि बात की जाए अमेठी के अन्य गांवों की जिन्हें स्व. मनोहर पर्रिकर ने गोद लिया था तो उन गांवों की वर्तमान स्थिति काफी हद तक सुदृढ़ हो चुकी है. जब स्व. पर्रिकर उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सांसद थे, तब उन्होंने वर्ष 2015 में बरौलिया व वर्ष 2017 में हरिहरपुर गांव को गोद लिया था. पर्रिकर ने यहां न सिर्फ बेहतरीन सड़कें, स्कूल, सोलर लाइट्स व स्किल डेवलपमेंट कैंप्स लगवाए बल्कि प्राथमिक विद्यालयों व तालाबों का सौंदर्यीकरण भी करवाया था. यही नहीं पर्रिकर इन गांवों के संपर्क में भी लगातार रहते थे. वहीं राहुल पर अमेठी के साथ ‘टूरिस्ट’ की तरह व्यवहार करने का आरोप लगता रहा है.
गांधी परिवार के गढ़ के रूप में माने जाने वाला लोकसभा क्षेत्र अमेठी विकास की राह में बहुत पीछे है. अब जबकि हारून ने चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है तो उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अमेठी में उनका पूरा समुदाय हाशिये पर और उसे कांग्रेस नेतृत्व द्वारा उपेक्षित किया जा रहा है. सनद रहे, अमेठी सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं. अमेठी में लगभग 16 प्रतिशत यानि करीब 3 लाख वोटर मुस्लिम समुदाय से हैं.
बहरहाल, अमेठी में राहुल गांधी को इस बार भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी से कड़ी चुनौती मिल रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में भी स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी थी और राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के बीच के जीत का अंतर पहले की तुलना में काफी कम था. अब जबकि हारून भी चुनाव मैदान में होंगें तो देखना यह होगा कि अमेठी में उँट किस करवट बैठता है.
दावा त्याग – लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. आप उनको फेसबुक अथवा ट्विटर पर सम्पर्क कर सकते हैं.
