वी लव यू…विभु

मरा नहीं मेरा लाल
अमर हुआ है

तुम्हारे लिए

क्योंकि देश तो तुम से ही है ना?

तो उसके जाने पर
देश का जयगान करने से
तुम्हें जो रोकता है

शत्रु के विरुद्ध नारे लगाने पर
तुम्हें जो टोकता है

तुम्हारे सभ्यता घावों में
नामक जो झोंकता है

क्या उसके आघात सहोगे?

उजड़ा नहीं मेरा सुहाग
वीरगत हुआ है

तुम्हारे लिए

क्योंकि देश तो तुम से ही है ना?

तो उसके बलिदान को
एक सामान्य घटना
जताने वालों को

उसके शौर्य से
ध्यान हटाने वालों को

एक देश को भागों में
बाँटने वालों को

ऐसे ही झेलते रहोगे?

आक्रमण नहीं हुआ मुझ पर
इस्लामी उग्रवाद का आघात और संदेश है

तुम्हारे लिए
क्योंकि देश तो तुम से ही है ना?

तो क्या अब भी
इस मानसिकता का

जीवों के प्रति
अमानवीयता का

देश धर्म के नाश में लिप्त
सक्रियता का

संहार न करोगे ?

 

कवयित्री : डिंपल कौल

नोट :- यह कविता भारत के हर बहादुर बेटे को समर्पित, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में वीर गती प्राप्त की है.
ये सर्व प्रथम उनके ब्लॉग पे पब्लिश हुआ था