तब भारद्वाज बोले, “हे ऋषिवर, आपने मुझे परम पुनीत राम-कथा सुनाई, जिसे सुनकर मैं कृतार्थ हुआ. परन्तु लंका-विजय के बाद बानरो के चरित्र के विषय में आपने कुछ नहीं कहा.
तब भारद्वाज बोले, “हे ऋषिवर, आपने मुझे परम पुनीत राम-कथा सुनाई, जिसे सुनकर मैं कृतार्थ हुआ. परन्तु लंका-विजय के बाद बानरो के चरित्र के विषय में आपने कुछ नहीं कहा.
“का हुआ भेटनर भईया”; हाथ पर लगी पट्टी देखकर चेला टैप लड़के ने पूछा. जबाब मिला; “छुरा लागल बा”. तब बारहवीं में 16 से 19 वर्ष के छात्र हुआ करते