इतिहास में जाकर उस समय की सच्चाई का अनुभव तो दूर, कल्पना तक कर पाना भी बहुत दुष्कर कार्य है । और यदि किसी देश का अधिकतर इतिहास विदेशियों द्वारा लिखा
इतिहास में जाकर उस समय की सच्चाई का अनुभव तो दूर, कल्पना तक कर पाना भी बहुत दुष्कर कार्य है । और यदि किसी देश का अधिकतर इतिहास विदेशियों द्वारा लिखा