प्रधानमंत्री ने मंगलवार को अहमदाबाद में नए सिविल लाइंस अस्पताल के निरीक्षण के बाद भाषण दिया. भाषण में वह पाकिस्तान और देश के गद्दार नेताओं पर जमकर बरसे. अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 2008 में हुए हमले का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा; ‘‘क्या उस वक्त दिल्ली में बैठे लोगों को पाकिस्तान में बैठे लोगों को सबक नहीं सिखाना चाहिए था?”
मोदी जी ने बताया कि उन्हें आज भी वो मंजर याद है जब उन्होंने अस्पताल में बिछी लाशें और खून से लथपथ नर्सों को देखा था. उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में जानें बचाई जाती हैं पर आतंकवाद ने यहाँ मासूम लोगों की जान ले ली थी. प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि भारत में आतंकवादी हमलों के लिए जिम्मेदार लोग अगर पाताल में भी छिपे होंगे तो वह उन्हें खोज निकालेंगे. पीएम मोदी ने आतंकियों को पाताल से भी खोज निकालने और देश के दुश्मनों को घर में घुसकर मारने की बात भी कही.
अपने भाषण में पीएम मोदी ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि कुछ नेता जो बयान बाजी करते है, उन्हें पाकिस्तान के अखबारों में हैडलाइन बना दी जाती है. उन्होने कहा कि अगर मैं अपना काम ठीक से न करूँ तो मुझे गाली दो पर देश के सैनिकों पर शक करके उनके मनोबल क्यों गिराते हो. मोदी जी ने 26/11 के बाद की चुप्पी पर भी उस वक्त की सरकार को लताड़ा.
पीएम मोदी ने कहा; ‘’मैं अब लम्बा इंतजार नहीं कर सकता. चुन-चुन के हिसाब लेना मेरी फितरत है. वर्षों से आतंकवाद हिन्दुस्तान के सीने में गोलियां दाग रहा है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति में डूबे लोग कदम उठाने से डरते थें. मुझे सत्ता की कुर्सी की परवाह नहीं है, मुझे चिंता मेरे देश की है. मेरे देश के लोगों की सुरक्षा की चिंता है.’’
ज्ञात रहे कि 26/11 के बाद उस समय की UPA सरकार ने न तो पाकिस्तान को कोई कड़ा जवाब दिया न ही कोई चेतावनी बल्कि कांग्रेस के नेताओं ने उसे RSS और हिंदुओं को दोषी करार दिया. वो तो भला हो शहीद तुकाराम ओम्बले का जो उन्होंने कलावा पहने कसाब को ज़िंदा पकड़ा. देखा जाए तो NDA काल में भी 2001 में भी संसद जो कि देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण संस्था है, उस पर भी हमला हुआ. दुख की बात यह है कि इसका बदला लेने के लिए जब NDA सरकार ने ऑपरेशन पराक्रम लांच किया जिसके दौरान ही कालूचाक में बस पर आतंकवादी हमला हुआ.
जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामकता दिखाई है, अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया है वो अभी तक शायद ही कोई प्रधानमंत्री और उनकी सरकार कर पाई हो. हर आतंकवादी हमले के बाद शांति बनाए रखने की बात कही जाती है, पर अब वक़्त आ चुका है कि आतंक को मुँहतोड़ जवाब दिया जाए. अगर दुश्मन जंग चाहता है तो आपके अमन चैन की कामना करना बेकार है.
