ये नया भारत है: ये चोरों को उनके घर से उठाकर ले आता है!

दुबई में एक प्राइवेट जेट के अंदर कुछ अधिकारियों द्वारा एक व्यक्ति को बैठाया जाता है. उस व्यक्ति के वकील जब UAE रक्षा एजेंसी पहुंचते हैं तो पता चलता है कि जेट उड़ान भर चुका है. उसे अब रोका नहीं जा सकता है. यह खबर मिलते ही भारत की राजनीति में कौतूहल का माहौल बन जाता है. टीवी चैनलों के संवाददाता कैमरा और माइक लेकर दौड़ पड़ते हैं. आखिर कौन है यह व्यक्ति जिसके प्रत्यर्पण से भारत की राजनीति गर्म हो गयी है.

इस व्यक्ति का नाम है राजीव सक्सेना. आपने शायद यह नाम पहली बार सुना हो, लेकिन एक बार इनके कारनामे सुनेंगे तो यह नाम कभी भूल नहीं पाएंगे. राजीव सक्सेना के तार ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले से जुड़े हैं. इस पूरे सौदे के दौरान इनकी भूमिका संदिग्ध रही है. प्रवर्तन निदेशालय ने सितंबर 2017 में ही ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के केस में इनके खिलाफ एक चार्जशीट फ़ाइल की थी. इनके ऊपर इस पूरे सौदे में काले धन को सफेद करने के आरोप हैं. इसके बाद पिछले महीने इन्होंने दिल्ली की अदालत में अंतरिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी जिसका प्रवर्तन निदेशालय ने विरोध किया था.

दरअसल राजीव सक्सेना और इनकी पत्नी शिवानी सक्सेना दुबई की दो कम्पनियों के निदेशक हैं. इसके साथ ही राजीव सक्सेना मॉरीशस की एक कम्पनी के भी निदेशक हैं. प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इन्हीं कम्पनियों के द्वारा ऑगस्टा वेस्टलैंड घोटाले में पैसे की हेरा फेरी की गई थी. इस पूरे कांड में इनके साथ दुबई में ही रहने वाले दीपक तलवार नामक एक व्यक्ति की भी संदिग्ध संलिप्तता थी. दीपक तलवार की भी कहानी बहुत दिलचस्प है. रसूख और पहुँच के मामले में महाशय का कोई हाथ नहीं पकड़ सकता है. पिछली सरकार में यह कई रक्षा सौदों में भी संलिप्त रहे हैं. अदालत द्वारा एक दूसरे मामले में इनके दुबई से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गयी थी. सरकार की कोशिशों के बाद किसी तरह से इनको प्रत्यर्पित कर भारत वापस लाया जा रहा है.

इस घटना के बाद दो महत्वपूर्ण सवाल खड़े होते हैं. आखिर देश में इतने बड़े घोटालों के आरोपी अब तक क्यों नहीं पकड़े गए थे. इसके साथ ही वो क्या कारण थे जिनके आधार पर दीपक तलवार को पिछली सरकार द्वारा रक्षा सौदों में सम्मिलित किया गया था. क्या यह देश की रक्षा नीति और सुरक्षा व्यवस्था से एक खतरनाक समझौता नहीं था. इसकी जवाबदेही किसकी है?

इस बीच राजीव सक्सेना की वकील गीता लूथरा और प्रतीक यादव भी पूरी जान लगाए पड़े हैं. उनका कहना है कि इस प्रत्यर्पण में UAE के प्रत्यर्पण नियमों का पालन नहीं किया गया है. उनको उनके परिवार से भी बात नहीं करने दी जा रही है. कहानी क्या है, यह तो सरकार और UAE के अधिकारी जानें, लेकिन इसमें असल फायदा जनता का होता हुआ दिखाई दे रहा है. देश के अंदर ही घोटाले करने के बाद मंत्री पद पा जाने वाले नेताओं को लंबे समय से देखती आ रही जनता के लिए यह एक अलग अनुभव है. उनकी गाढ़ी कमाई को लूटने वालों से उसका हिसाब अब लिया जा रहा है. देश में घोटाले के आरोपी अब विदेशी धरती से पकड़ कर लाये जा रहे हैं. पिछले दिनों ही इस डील में बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को पकड़ कर लाया गया था. अब देखना यह है कि इन दोनों लोगों से प्रवर्तन निदेशालय क्या ठोस जानकारियां इकट्ठी करता है. 

2 Comments

  1. :-जीजा जी-:
    January 31, 2019 - 3:16 pm

    ये “इनके-इनके” क्या लगा रक्खा है इत्ती देर से..”इसके” कहो..
    चोर है ये साला.. और चोरों के लिये इतना सम्मान जरूरी नहीं है..

  2. January 31, 2019 - 4:23 pm

    Well done Truely Commendable job we all are feeling proud

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