वोट निंद्य है ।
वोट निंद्य बेशर्मराज पर कहो नीति अब क्या हो?
कैसे वोटर रिझे आज फिर पांव तले तकिया हो?
प्रतिपल मूर्ख वोटर को ठगता, मफ़लर-बद्ध चेहरा हो ;
खोंखोंखोखों विजयनाद से गर्दभ सिर सेहरा हो..
भगत सिंह की फोटो हो और एंकरश्री का साथ,
रहे पुलिंदा प्रश्नों का और दस जनपथ का हाथ।
अंडे, स्याही संग झाडू के, थप्पड़ भी अब अस्त्र,
खाने से डोनेशन मिलता, है आयोग भी त्रस्त।
ये अंडे थप्पड़ स्याही कीचड़ का अभ्यस्त ।
आयोग बेचारा ऐसी बेशर्मी के आगे पस्त ।।
दिल्ली में फिर से कालयवन आया है
क्या इसके ऊपर कोई विदेशी साया है..
जुटा रखी जिसने झूठी क्रान्ति की फ़ौज कदमो पर,
दिखा चुके आइना उसे वोटर वाराणसी की सडको पर ।
योग करें सीटों को, बोलें दो और दो हैं पाँच,
योगी, ढोंगी संग सिसोदिया झूठ को करते सांच।
साँच आँच पर भून खा गये रिफ्यूजी पत्रकार ।
आवारा दिल्ली के लोफर करते जयजयकार ।।
झाड़ू को गांडीव समझते भाड़े के सेनानी,
गुलेल हाथ में लिये “शिखंडी” गाये क्रांति-कहानी…
मिला शिखंडी संग दुर्योधन, करता रोज बवाल,
उधर पितामह पांडव के संग, अद्भुत यह कलिकाल।
अराजकता फैला रहा, आम आदमी है त्रस्त
ईमानदारी की सर्टिफिकेट, बाकि सब हैं भ्रस्ट
कलियुग का धृतराष्ट्र बना है दुर्योधन का चारण,
प्रश्न उठ रहे कैसे-कैसे, करता कौन निवारण।
कविद्वय
श्री शिव मिश्र @mishrashiv
श्री आशुतोष @cawnporiah

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