एक आम 21-22 साल के नौजवान से आप राजनीति के बारे में कोई सवाल पूछें तो वह आपको बड़े अनमने ढंग से जवाब देगा; “यू नो पॉलिटिक्स इस नॉट माई कप ऑफ टी”. सारे नेता चोर हैं, उसके मन में यही छवि है नेताओं की. आप उससे दो चार सवाल करें वो आपको कुछ एक दो मीम या आशीष चंचलानी के वीडियो दिखाकर मुद्दे से भटकाने की फिराक में रहेगा. लेकिन इस यूट्यूब एडिक्ट के राय की आखिर ज़रूरत क्या है,अहमियत क्या है जिसको यह भी नहीं पता कि देश का राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति कौन है. वे क्या सोचते हैं इससे क्या फर्क पड़ेगा?
फर्क पड़ेगा. 24 घंटे PUBG खेलने वाले भला ही यह ना जाने कि कौन देश का विदेश मंत्री है पर वह वोटर सेल्फी अपलोड करने के लिए वोट देने ज़रूर जाएंगा. और वोट देने जब जाएगा तो या तो नोटा दबाएगा या फिर उसके कूल कॉमेडियन्स के बहकावे में आकर वह रूलिंग पार्टी का घमंड तोड़ने और उसको सबक सिखाने का प्रण ले लेगा. इस कूल युवा का मन चंचल है. इस कूल युवा को सड़कें ‘Abroad’ जैसी साफ चाहिए पर स्वच्छ भारत उसकी नज़र में केवल एक जुमला है. जुमला इसीलिए है क्योंकि यूट्यूब के ट्रेंडिंग वीडिओज़ के हिसाब से नरेंद्र मोदी केवल जुमला देते हैं. बड़ी बड़ी बातें करते हैं, विदेश घूमने जाते हैं. उसे लगता है कि रूलिंग पार्टी केवल हिन्दू मुस्लिम करती है. वह ये पढ़ता है कि गौ रक्षकों ने किसी पर गाय का मांस खाने पर हमला किया. पर यह नहीं जान पाता कि कई गौ तस्कर पुलिस वालों और किसानों की हत्या उसकी गाय चुराने के लिए कर देते हैं. उसे बताया भी जाए तो वह कहता कि यह फेक न्यूज़ लगती है.
यह कूल जनरेशन LGBTQ के लिए पोस्ट डालते हैं, रिग्रेसिव माइंडसेट को कोसते हैं और सबका ठीकरा हिंदूइज्म पर फोड़ते हैं. पर वे यह नहीं जान पाते कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से केवल मुस्लिम समुदाय और चर्च नाराज़ था, हिन्दू संत नहीं. यह कूल वर्ग यह नहीं जानता कि कई गांवों में सालों से बिजली सड़क भी नहीं थी, आज जाकर वहाँ बिजली आई है. यह कूल वर्ग न उज्ज्वला योजना के बारे में जनता है और ना ही वो आयुष्मान स्कीम से हो रही लाखों गरीबों के फ़्री इलाज के बारे में जनता है.वो यह बात क्यों नहीं जान पाता?
जवाब है ईकोसिस्टम. वह ईकोसिस्टम जो हिन्दुओं को, रूलिंग पार्टी को गाली देने में ज़रा भी देर नहीं करता. ईकोसिस्टम जो ट्रिपल तलाक के खिलाफ मुंह नहीं खोलता पर आज भी सती प्रथा की बात करता है. ईकोसिस्टम जो फेक न्यूज़ खुद ही बनाता है और दूसरों की फेक न्यूज़ के खुलासे तभी करता है जब वो फेक न्यूज़ उसके एजेंडे के अधीन न हो. यह ईकोसिस्टम ही है जिसने हमारे युवा वर्ग का इस कदर ब्रेनवाश किया है जिसका खामियाजा आगे की कई पीढियां भुगतेंगी.
यह कूल वर्ग सोचता है कि भारत ही सबसे पिछड़ा देश है. यह कूल वर्ग वो है जिसे अंदाज़ा भी नहीं है कि छठी से लेकर दसवीं तक उसने जो इतिहास पढ़ा है, वह केवल मुग़लों की वाहवाही करता है. यह कूल वर्ग अपने माँ बाप को पुरानी सोच का मानता है. यह अपने Goals सोशल मीडिया के तहत बनाता है, ध्रुव राठी के वीडियो देखता है और उसके बताए गए सभी मनगढ़ंत आकंडों को सही मान बैठता है क्योंकि उसे कोई ये बताने वाला ही नहीं है कि सही आंकड़े क्या हैं.
पर जो भी जो यह कूल वर्ग है तो वोटर ही. इसे आकर्षित करना ज़रूरी है. ज़रूरी है Youtube पर ट्रेंडिंग सेक्शन में कोई हमारे समर्थन में भी बात करे. ज़रूरी है कि इसी ईकोसिस्टम में घुस कर अपनी पैठ बनाई जाए. अगर किसी खेल के नियम ही गलत हो तो आप ईमानदारी से खेल भी लें तो कोई फायदा नहीं है. इस कूल वर्ग को हम अनदेखा नहीं कर सकते क्योंकि यह एक बड़ा वोटर बेस है. भारत सबसे युवा देश है, यह बात भाषणों में हमने काफी सुनी है पर ज़रुरी यह है कि इस युवा वर्ग की उपेक्षा न की जाए. उन्हे सुना,समझा और जहाँ जरुरत हो,समझाया जाए ताकि वे राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन सकें.
