डॉ राजेन्द्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष रहे थे। भारतीय गणतंत्र के प्रथम राष्ट्रपति हुए। वह कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे थे और एक प्रतिष्ठित कानूनविद और शिक्षाविद थे। स्वतन्त्रता आंदोलन में भी बिहार से वे सबसे बड़े नाम थे। उनकी मेधा के चर्चे आज भी होते हैं। राजेन्द्र बाबू मैट्रिक की परीक्षा में बंगाल बोर्ड से टॉप हुए थे। तब बंगाल बोर्ड के अंतर्गत ही बिहार, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, बंगलादेश व सम्पूर्ण उत्तर पूर्व के विद्यार्थी परीक्षा देते थे। बिहारी जनमानस में उनके मेधा की अनेकों दिलचस्प कहानियां हैं जिसे बिहार में सब अपने-अपने शब्दों में सुनाते हैं। ऐसी ही एक रोचक कहानी है:
“रजिंदर बाबू के पास पइसा नही रहा। त उ छपरा (सारण) से परीच्छा देने पटना पैदल ही गये और 1 घंटा देरी से पहुँचे। पहिले तो मास्टर ने पेपर देने से ही मना कर दिया। किसी तरह पेपर मिला तो रजिंदर बाबू पहिले खैनी बनाने लगे। मास्टर बोला कि तू तs फेले है,खा लो खैनी। आ फिर खैनी खाकर रजिंदर बाबू जेब से दू गो कलम निकाले और दुन्नो हाथे लिखने लगे। तीन घण्टा का परिच्छा था। घंटे भर में लिख कर निकल गए। लेकिन जब नतीजा आया त कापी पर लिखा था कि परिच्छार्थी जो है ऊ परिछक से जादे तेज है।” बहरहाल, इस कथा में कुछ तथ्य है और कुछ दन्तकथा के तत्व भी लेकिन एक अनाम परीक्षक की राजेन्द्र बाबू की कॉपी पर की गई टिप्पणी “Examinee knows better than the Examiner” ने कितने ही विद्यार्थियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उच्च शिक्षा के लिए संघर्ष करने को प्रेरित किया है।
इन लोककथाओं से बाहर राजेन्द्र बाबू का राजनीतिक जीवन अनूठा रहा है। महात्मा गाँधी का सहयोगी होने के बावजूद उन्होंने असहमति का अधिकार छोड़ा नही था। गाँधी के ‘ब्रह्मचर्य के प्रयोगों’ पर राजेन्द्र बाबू बहुत नाराज हुए थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि उनके परिवार की महिलाएं गाँधी आश्रम नही जाएं। खिलाफत आंदोलन पर राजेन्द्र बाबू और गाँधी जी की पहले दिन से ही असहमति रही। खिलाफत के परिणामस्वरूप मोपला के भयानक दंगे में हिंदुओं का नरसंहार हुआ तो उसके बाद राजेन्द्र बाबू ने बिहार हिन्दू सभा को पुनर्जीवित किया। यहाँ यह याद रखना भी आवश्यक होगा कि बिहार हिन्दू सभा के संस्थापकों में राजेन्द्र बाबू भी शामिल थे। 1923 के अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के गया अधिवेशन की अध्यक्षता के लिए मदन मोहन मालवीय को राजेन्द्र बाबू ने ही तैयार किया। कम से कम 1926 तक हिन्दू महासभा के साथ राजेन्द्र बाबू सक्रिय रहे।
मौलाना आजाद अपनी पुस्तक ‘इंडिया विंस फ्रीडम’ में लिखते हैं कि 1937 के चुनावों में कांग्रेस की बिहार में जीत हुई। लेकिन राजेन्द्र प्रसाद बिहार का प्रीमियर बनने के इच्छुक न थे। ऐसे में नेहरू धड़े ने डॉ सैयद महमूद को प्रीमियर बनाने की कोशिश की। डॉ सैयद को मौलाना आजाद का भी समर्थन था। लेकिन राजेन्द्र बाबू ने वीटो कर दिया। तब श्रीकृष्ण सिंह और अनुग्रह नारायण को क्रमशः प्रीमियर और वित्त मंत्री बनाने का फरमान दे दिया गया। श्रीकृष्ण बाबू और अनुग्रह नारायण उस समय केंद्रीय सभा (राष्ट्रीय संसद) के सदस्य थे। उनसे बाकायदा इस्तीफा दिलवाया गया और फिर उन्होंने बिहार में अपना दायित्व संभाला। 1937 में राजेन्द्र बाबू द्वारा बनाई गई यह व्यवस्था इन तीनों ही नेताओं के देहांत तक जारी रही। श्रीकृष्ण पहले प्रीमियर बने और स्वतंत्रता के बाद मुख्यमंत्री और अनुग्रह नारायण पहले वित्त मंत्री और स्वतंत्रता के बाद वित्त मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहे।
कहते हैं कि राजेन्द्र बाबू के इसी वीटो ने नेहरू के दिल मे उनके लिए खटास पैदा कर दी। जिसके बाद दोनों के सम्बंध कभी भी सामान्य न हो सके। राजेन्द्र बाबू का राष्ट्रपति बनना भी आसान नहीं था। उन दिनों सरकार और पार्टी की कार्य योजनाओं को लेकर जो संघर्ष सरदार पटेल और नेहरू में चल रहा था,उसमें डॉ राजेन्द्र प्रसाद खुलकर अपने अभिन्न मित्र सरदार के साथ थे। ऐसे में भला नेहरू क्यों चाहते कि राजेन्द्र बाबू राष्ट्रपति बने। जब कांग्रेस कार्यसमिति राष्ट्रपति चुनाव के लिए बैठी तो नेहरू चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का नाम ले आये जबकि सरदार पटेल ने डॉ राजेन्द्र प्रसाद का नाम आगे बढ़ाया। कांग्रेस कार्यसमिति में पटेल के सामने नेहरू की एक न चलती थी। सहमति नही बन सकी और अगली बैठक तक मामला टाल दिया गया। अगली बैठक में नेहरू ने अपनी जेब से एक पत्र निकाल कर लहरा दिया और कहा कि राजेन्द्र प्रसाद खुद ही राष्ट्रपति पद के लिए अनिच्छुक हैं और उन्होंने पत्र लिखकर बताया है। पटेल भागे भागे राजेन्द्र बाबू के पास गए और नाराजगी में बोले कि आपने ऐसा पत्र क्यों लिखा। राजेन्द्र बाबू में उत्तर दिया कि नेहरू हमसे कहने आये थे कि आप क्यों राष्ट्रपति बनना चाहते हैं तो मैंने कह दिया कि मैं कहाँ बनना चाहता हूँ, लोग बनाना चाहते हैं। नेहरू ने कहा कि ये बात लिखकर दे दीजिए तो मैंने लिख दिया। सरदार मुस्कुराये और राजेन्द्र बाबू से दूसरा पत्र लिखवाया जिसमे लिखा था कि यदि कांग्रेस कार्यसमिति उन्हे राष्ट्रपति पद का दायित्व सौंपे तो वे निभाने को तैयार हैं। नेहरू इस झटके को तैयार न थे। कांग्रेस कार्यसमिति से प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने की धमकी देकर नेहरू पैर पटकते बाहर निकल गए। लेकिन सरदार को इन बातों से कभी कोई फर्क नही पड़ता था। इस तरह राजेन्द्र बाबू के राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने का रास्ता साफ हुआ।
राष्ट्रपति पद पर काम करते हुए भी नेहरू और राजेन्द्र बाबू के मतभेद जगजाहिर होते रहे। हिन्दू कोड बिल पर भी तत्कालीन प्रधानमंत्री से उनका मतभेद रहा। सरदार पटेल के निधन के बाद जब राजेन्द्र बाबू को सोमनाथ मंदिर के शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया गए तो वे सहर्ष तैयार हो गए। नेहरू को यह नागवार गुजरी और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से राजेन्द्र बाबू को धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देकर रोकने का प्रयास किया। जब राजेन्द्र बाबू नही माने तो नेहरू जी के इशारे पर आकाशवाणी ने उस पूरे कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। काशी में राजेन्द्र बाबू का पुरोहितों के चरण छूना भी नेहरू को पसंद न आया। नेहरू 1957 की प्रतीक्षा करने लगे जब राष्ट्रपति पद के लिए अगला चुनाव होना था। नेहरू को विश्वास था कि पटेल के जाने के 7 साल बाद और 15 साल प्रधानमंत्री पद पर बिताने के बाद वे इतने शक्तिशाली तो हो ही गए हैं कि उनकी मर्जी के बगैर कोई राष्ट्रपति न बन सकेगा। इसी अतिआत्मविश्वास में नेहरू ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनने को तैयार रहने को कह दिया। लेकिन यह इतना आसान न रहने वाला था।
कांग्रेस के ही पुराने नेताओं ने राजेन्द्र बाबू को दुबारा राष्ट्रपति बनने के लिए तैयार किया। नेहरू को ये बात बिल्कुल पसंद नही आई। लेकिन कांग्रेस के अंदर राजेन्द्र बाबू की जबरदस्त लोकप्रियता थी। नेहरू को फिर मुँह की खानी पड़ी। अपनी सादगी, सरलता और निश्छलता से राजेन्द्र बाबू ने नेहरू के घमण्ड को हरा दिया था जिसे नेहरू कभी भूल न सके। राजेन्द्र बाबू के दुबारा राष्ट्रपति बनने से राधाकृष्णन इतने आहत हुए कि उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र लिख भेजा। 1962 में जब राजेन्द्र बाबू का कार्यकाल पूरा हुआ तो दिल्ली में लाखों लोग नम आंखों से उन्हें विदाई देने को उमड़ पड़े।
अपना कार्यकाल पूरा कर राजेन्द्र बाबू पटना लौट आये और बिहार विद्यापीठ के एक कमरे में रहने लगे। बिहार में उनके शिष्य और बिहार के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री रहे श्रीकृष्ण सिंह व अनुग्रह नारायण भी दिवंगत हो चुके थे। नए नेता दिल्ली की कृपा के आकांक्षी थे। ऐसे में राजेन्द्र बाबू के लिए आधारभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था भी नही हुई। उन्हें दमे की बीमारी थी जो दिनोंदिन बढ़ती गई। साल भर से कम समय मे उनकी मृत्यु हो गई। सबसे दुखद बात ये रही कि देश मे रहते हुए भी नेहरू अपने ही राष्ट्रपति के अंत्येष्टि में शामिल न हुए। इसके बदले अकाल से लड़ने के लिए चंदे का चेक लेने जयपुर जाना उन्हें ज्यादा ठीक लगा। नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को भी इस अंत्येष्टि में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया लेकिन शास्त्री और राधाकृष्णन नहीं माने।
आज देश प्रथम उपराष्ट्रपति का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाता है। प्रथम प्रधानमंत्री का जन्मदिन बाल दिवस कहलाता है। प्रथम गृहमंत्री व उपप्रधानमंत्री का जन्मदिन एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन देश के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष का जन्मदिन किस तरह मनाया जाता है?
राजेन्द्र बाबू जिस संविधान के सभा के अध्यक्ष थे और जिनकी देख रेख में देश का संविधान बना, उसका श्रेय भी अब ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष डॉ अंबेडकर को ही दिया जाता है। यहाँ तक कि मुजफ्फरपुर के जिस भूमिहार ब्राह्मण कॉलेज में राजेन्द्र बाबू ने अंग्रेजी पढ़ाई थी, उसी कॉलेज के कैंपस को जब विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया गया तो उसका नाम ‘बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय’ रखा गया। राजेन्द्र बाबू के कैम्पस को ही उनका नाम न मिल सका।
राजेन्द्र बाबू की स्मृतियों को धूमिल करने के षड्यंत्र का लाभ चाहे जिसे हुआ हो, उसका नुकसान देश को ही हुआ है। ऐसे महान व्यक्तित्व को शिलापट्ट,स्मृति चिन्हों और जन्म जयन्ती समारोहों के मान्यता की आवश्यकता नहीं होती। अलबत्ता, देशरत्न के लिए ऐसी उपेक्षा का भाव हमारी कृतघ्नता की चुगली अवश्य करने लगती है.
लेखक : मुकुल मिश्रा @MukulKMishra

23 Comments
937842 854642Excellent blog here! Also your web site loads up rapidly! What host are you utilizing? Can I get your affiliate link to your host? I wish my site loaded up as rapidly as yours lol 437918
863911 647615I believe 1 of your commercials caused my internet browser to resize, you may effectively want to put that on your blacklist. 848659
120679 344855Excellent post, thanks so considerably for sharing. Do you happen to have an RSS feed I can subscribe to? 847049
443031 218271I recognize there is definitely a great deal of spam on this blog. Do you want aid cleansing them up? I may possibly support in between classes! 390753
458476 24206Awesome read , Im going to spend more time researching this topic 434998
511423 232223Definitely composed content material material , thankyou for information . 548709
128563 531068Quite informative and wonderful complex body part of articles , now thats user pleasant (:. 273270
728052 337892Yay google is my king aided me to discover this great website ! . 113939
647211 737061Wow! This could be 1 specific with the most helpful blogs Weve ever arrive across on this topic. Truly Great. Im also an expert in this subject therefore I can recognize your hard function. 798042
668068 352112I truly like your writing style, great details, thankyou for posting : D. 597346
686064 267192This sounds in a way inflammatory pending mecant wait for thisthank you! 651339
254245 632238I like this website very much so a lot superb info . 444776
306851 817506Wholesale Low-cost Handbags Will you be ok merely repost this on my site? Ive to allow credit exactly where it can be due. Have got a great day! 109764
613703 977743Yay google is my king helped me to locate this outstanding internet site! . 795166
780894 259430Thank you for this. Thats all I can say. You most definitely have created this into something thats eye opening and critical. You clearly know so considerably about the subject, youve covered so a lot of bases. Excellent stuff from this part of the internet. 875659
942150 234351I just put the link of your weblog on my Facebook Wall. very nice blog indeed.,-, 944793
944448 487741This design is steller! You naturally know how to keep a reader amused. Between your wit and your videos, I was almost moved to start my own weblog (effectively, almostHaHa!) Fantastic job. I genuinely enjoyed what you had to say, and much more than that, how you presented it. Too cool! 474199
687080 211857Maintain up the amazing piece of work, I read few blog posts on this web website and I believe that your web site is real intriguing and has lots of wonderful information. 870614
66160 497725Hmm is anyone else experiencing troubles with the images on this blog loading? Im trying to discover out if its a problem on my end or if it is the blog. Any responses would be greatly appreciated. 100890
766703 884279The excellent intreguing articles keep me coming back here time and time again. thank you so considerably. 135819
194151 737253Hey there! Very good stuff, do maintain us posted when you finally post something like that! 465243
893083 328372naturally like your website but you need to test the spelling on several of your posts. 973863
939401 302624I actually like reading by means of and I feel this internet site got some genuinely utilitarian stuff on it! . 843080